vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 7: उत्तर काण्ड
»
सर्ग 22: यमराज और रावण का युद्ध, यम का रावण के वध के लिये उठाये हुए कालदण्ड को ब्रह्माजी के कहने से लौटा लेना, विजयी रावण का यमलोक से प्रस्थान
»
श्लोक 33
श्लोक
7.22.33
तत: संरक्तनयन: क्रुद्धो वैवस्वत: प्रभु:।
कालदण्डममोघं तु तोलयामास पाणिना॥ ३३॥
अनुवाद
तत्पश्चात् क्रोध से लाल आँखें करके शक्तिशाली वैवस्वत यम ने अपने हाथ से अपना अमोघ कालदण्ड उठाया।
Thereafter, with eyes red with anger, the powerful Vaivaswat Yamna raised his infallible Kaaldanda with his hand.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas