श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 22: यमराज और रावण का युद्ध, यम का रावण के वध के लिये उठाये हुए कालदण्ड को ब्रह्माजी के कहने से लौटा लेना, विजयी रावण का यमलोक से प्रस्थान  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.22.3 
तस्य सूतस्तदा दिव्यमुपस्थाप्य महारथम्।
स्थित: स च महातेजा अध्यारोहत तं रथम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
तब उनका सारथी तुरन्त एक विशाल एवं दिव्य रथ लेकर वहाँ आया और उनके सामने विनम्रतापूर्वक खड़ा हो गया। तब महाबली यमराज उस रथ पर सवार हुए।
 
Then his charioteer immediately brought a huge and divine chariot there and stood humbly in front of him. Then the mighty god Yama mounted the chariot.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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