श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 22: यमराज और रावण का युद्ध, यम का रावण के वध के लिये उठाये हुए कालदण्ड को ब्रह्माजी के कहने से लौटा लेना, विजयी रावण का यमलोक से प्रस्थान  »  श्लोक 25-29
 
 
श्लोक  7.22.25-29 
नैषा रक्षो भवेदद्य मर्यादा हि निसर्गत:।
हिरण्यकशिपु: श्रीमान् नमुचि: शम्बरस्तथा॥ २५॥
निसन्दिर्धूमकेतुश्च बलिर्वैरोचनोऽपि च।
शम्भुर्दैत्यो महाराजो वृत्रो बाणस्तथैव च॥ २६॥
राजर्षय: शास्त्रविदो गन्धर्वा: समहोरगा:।
ऋषय: पन्नगा दैत्या यक्षाश्च ह्यप्सरोगणा:॥ २७॥
युगान्तपरिवर्ते च पृथिवी समहार्णवा।
क्षयं नीता महाराज सपर्वतसरिद‍्द्रुमा॥ २८॥
एते चान्ये च बहवो बलवन्तो दुरासदा:।
विनिपन्ना मया दृष्टा: किमुतायं निशाचर:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
महाराज! यह मेरी स्वाभाविक मर्यादा है कि यह राक्षस मुझसे युद्ध करके जीवित नहीं रह सकता। श्री हिरण्यकशिपु, नमुचि, शम्बर, निसण्डि, धूमकेतु, विरोचनकुमार बलि, शम्भु नामक राक्षस, राजा वृत्र और बाणासुर, शास्त्रों के अनेक विद्वान, राजर्षि, गन्धर्व, बड़े-बड़े नाग, ऋषि, नाग, राक्षस, यक्ष, अप्सराओं का समुदाय, अन्तकाल में समुद्र, पर्वत, सरिता और वृक्षों सहित पृथ्वी- ये सब मेरे द्वारा नष्ट हो गये हैं। ये तथा अन्य अनेक बलवान एवं अजेय योद्धा भी मेरे द्वारा नष्ट किये जा चुके हैं, फिर यह रात्रिचर किसकी संख्या में है? 25-29॥
 
Maharaj! It is my natural dignity that this demon cannot survive after fighting with me. Mr. Hiranyakashipu, Namuchi, Shambar, Nisandi, Dhumketu, Virochankumar Bali, the demon named Shambhu, King Vritra and Banasur, many scholars of scriptures, Rajarshi, Gandharva, big serpents, sages, snakes, demons, Yakshas, ​​community of Apsaras, the earth along with the seas, mountains, streams and trees in the last period - all these got destroyed by me. Are. These and many other strong and invincible warriors have also been destroyed by me, then in whose number is this night hunter? 25-29॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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