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ramayan 7.22.20: राक्षसराज रावण ने इन्द्र के बाणों की भाँति अपना धनुष खींचा और उस पर बाणों की वर्षा करने लगा। आकाश इतना भर गया कि एक इंच भी स्थान रिक्त नहीं रहा।   |   ramayan सर्ग 7.22: यमराज और रावण का युद्ध, यम का रावण के वध के लिये उठाये हुए कालदण्ड को ब्रह्माजी के कहने से लौटा लेना, विजयी रावण का यमलोक से प्रस्थान   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 22: यमराज और रावण का युद्ध, यम का रावण के वध के लिये उठाये हुए कालदण्ड को ब्रह्माजी के कहने से लौटा लेना, विजयी रावण का यमलोक से प्रस्थान  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  7.22.20 
राक्षसेन्द्रोऽपि विस्फार्य चापमिन्द्राशनिप्रभम्।
निरन्तरमिवाकाशं कुर्वन् बाणांस्ततोऽसृजत्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
राक्षसराज रावण ने इन्द्र के बाणों की भाँति अपना धनुष खींचा और उस पर बाणों की वर्षा करने लगा। आकाश इतना भर गया कि एक इंच भी स्थान रिक्त नहीं रहा।
 
The demon king Ravana, like Indra's arrows, pulled his bow and began to shower it with arrows. The sky became so full that not even an inch of space was left empty.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)