श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 22: यमराज और रावण का युद्ध, यम का रावण के वध के लिये उठाये हुए कालदण्ड को ब्रह्माजी के कहने से लौटा लेना, विजयी रावण का यमलोक से प्रस्थान  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.22.16 
एवं नानाप्रहरणैर्यमेनामित्रकर्षिणा।
सप्तरात्रं कृत: संख्ये विसंज्ञो विमुखो रिपु:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार यमराज ने युद्धभूमि में नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों का प्रयोग करते हुए लगातार सात रातों तक युद्ध किया, जिससे उसका शत्रु रावण मूर्छित होकर युद्ध से विमुख हो गया॥16॥
 
In this way, Yama, the warrior-sudan, fought on the battlefield for seven consecutive nights, using various kinds of weapons. Due to this, his enemy Ravana lost his senses and turned away from the battle.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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