श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 22: यमराज और रावण का युद्ध, यम का रावण के वध के लिये उठाये हुए कालदण्ड को ब्रह्माजी के कहने से लौटा लेना, विजयी रावण का यमलोक से प्रस्थान  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.22.15 
ततो महाशक्तिशतै: पात्यमानैर्महोरसि।
नाशक्नोत् प्रतिकर्तुं स राक्षस: शल्यपीडित:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् सैकड़ों महान् अस्त्र-शस्त्र उसकी विशाल छाती पर प्रहार करने लगे। शल्यों के प्रहारों से वह राक्षस इतना पीड़ित हो गया कि यमराज से बदला लेने में असमर्थ हो गया॥15॥
 
Thereafter hundreds of great weapons started hitting his huge chest. The demon was so much afflicted by the attacks of the Shalyas that he was not able to take revenge from Yamraj.॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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