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ramayan 7.22.11: उनकी शक्ति सीमित थी, इसलिए वे भयभीत होकर अपनी सुध-बुध खो बैठे और 'हम यहाँ युद्ध करने में समर्थ नहीं हैं' कहते हुए विभिन्न दिशाओं में भाग गए ॥11॥   |   ramayan सर्ग 7.22: यमराज और रावण का युद्ध, यम का रावण के वध के लिये उठाये हुए कालदण्ड को ब्रह्माजी के कहने से लौटा लेना, विजयी रावण का यमलोक से प्रस्थान   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 22: यमराज और रावण का युद्ध, यम का रावण के वध के लिये उठाये हुए कालदण्ड को ब्रह्माजी के कहने से लौटा लेना, विजयी रावण का यमलोक से प्रस्थान  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.22.11 
लघुसत्त्वतया ते हि नष्टसंज्ञा भयार्दिता:।
नेह योद्धुं समर्था: स्म इत्युक्त्वा प्रययुर्दिश:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
उनकी शक्ति सीमित थी, इसलिए वे भयभीत होकर अपनी सुध-बुध खो बैठे और 'हम यहाँ युद्ध करने में समर्थ नहीं हैं' कहते हुए विभिन्न दिशाओं में भाग गए ॥11॥
 
Their strength was limited. So they were overcome with fear and lost their senses and ran away in different directions saying, 'We are not capable of fighting here.' ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)