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ramayan 7.21.44: युद्धस्थल में अग्नि की ज्वालाओं से घिरा हुआ वह बाण धनुष से छूटते ही वृक्षों और झाड़ियों को जलाने लगा और बड़े वेग से आगे बढ़ने लगा और मांसाहारी पशु उसका पीछा करने लगे ॥44॥   |   ramayan सर्ग 7.21: रावण का यमलोक पर आक्रमण और उसके द्वारा यमराज के सैनिकों का संहार   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 21: रावण का यमलोक पर आक्रमण और उसके द्वारा यमराज के सैनिकों का संहार  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  7.21.44 
ज्वालामाली स तु शर: क्रव्यादानुगतो रणे।
मुक्तो गुल्मान् द्रुमांश्चापि भस्म कृत्वा प्रधावति॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
युद्धस्थल में अग्नि की ज्वालाओं से घिरा हुआ वह बाण धनुष से छूटते ही वृक्षों और झाड़ियों को जलाने लगा और बड़े वेग से आगे बढ़ने लगा और मांसाहारी पशु उसका पीछा करने लगे ॥44॥
 
On the battlefield, that arrow, surrounded by flames, as soon as it was released from the bow, started burning the trees and bushes and moved forward at a great speed, and the carnivorous animals started following it. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)