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ramayan 7.21.43: उस समय धुएँ और ज्वालाओं से भरा हुआ उनका बाण ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो ग्रीष्म ऋतु में वनों को जलाने के लिए सम्पूर्ण दिशाओं में फैलने वाली दावानल हो ॥ 43॥   |   ramayan सर्ग 7.21: रावण का यमलोक पर आक्रमण और उसके द्वारा यमराज के सैनिकों का संहार   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 21: रावण का यमलोक पर आक्रमण और उसके द्वारा यमराज के सैनिकों का संहार  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  7.21.43 
तस्य रूपं शरस्यासीत् सधूमज्वालमण्डलम्।
वनं दहिष्यतो घर्मे दावाग्नेरिव मूर्च्छत:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
उस समय धुएँ और ज्वालाओं से भरा हुआ उनका बाण ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो ग्रीष्म ऋतु में वनों को जलाने के लिए सम्पूर्ण दिशाओं में फैलने वाली दावानल हो ॥ 43॥
 
At that time, the form of his arrow, filled with smoke and flames, appeared like a forest fire spreading in all directions to burn down the forests in the summer season. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)