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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 21: रावण का यमलोक पर आक्रमण और उसके द्वारा यमराज के सैनिकों का संहार  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  7.21.42 
आकर्णात् स विकृष्याथ चापमिन्द्रारिराहवे।
मुमोच तं शरं क्रुद्धस्त्रिपुरे शंकरो यथा॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार भगवान शंकर ने त्रिपुरासुर पर पाशुपतास्त्र का प्रयोग किया था, उसी प्रकार इन्द्र के शत्रु रावण ने अपने धनुष को कान तक खींचकर बाण छोड़ा था।
 
Just as Lord Shankar had used Pashupatastra on Tripurasura, in the same manner Ravana, the enemy of Indra, pulled his bow till his ear and released the arrow.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)