Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.21.41: उन्होंने पाशुपत नामक दिव्यास्त्र को अपने धनुष पर चढ़ाया और सैनिकों को प्रतीक्षा करने को कहकर उसे खींचा ॥ 41॥   |   ramayan सर्ग 7.21: रावण का यमलोक पर आक्रमण और उसके द्वारा यमराज के सैनिकों का संहार   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 21: रावण का यमलोक पर आक्रमण और उसके द्वारा यमराज के सैनिकों का संहार  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  7.21.41 
तत: पाशुपतं दिव्यमस्त्रं संधाय कार्मुके।
तिष्ठ तिष्ठेति तानुक्त्वा तच्चापं व्यपकर्षत॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने पाशुपत नामक दिव्यास्त्र को अपने धनुष पर चढ़ाया और सैनिकों को प्रतीक्षा करने को कहकर उसे खींचा ॥ 41॥
 
He strung the divine weapon called Pashupata on his bow and pulled it while telling the soldiers to wait. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)