श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 21: रावण का यमलोक पर आक्रमण और उसके द्वारा यमराज के सैनिकों का संहार  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.21.4 
कच्चित् क्षेमं नु देवर्षे कच्चिद् धर्मो न नश्यति।
किमागमनकृत्यं ते देवगन्धर्वसेवित॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे देवताओं और गन्धर्वों से सेवित देवर्षि! क्या सब कुशल है? क्या धर्म का नाश नहीं हो रहा है? आज आपके यहाँ शुभ आगमन का क्या प्रयोजन है?॥4॥
 
O sage of Devarsena, served by the Gods and Gandharvas! Is everything alright? Is Dharma not being destroyed? What is the purpose of your auspicious arrival here today?'॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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