श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 21: रावण का यमलोक पर आक्रमण और उसके द्वारा यमराज के सैनिकों का संहार  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.21.3 
स तु दृष्ट्वा यम: प्राप्तं महर्षिं तत्र नारदम्।
अब्रवीत् सुखमासीनमर्घ्यमावेद्य धर्मत:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
महर्षि नारद को वहाँ आया देख यमराज ने आतिथ्य के नियमानुसार उन्हें पिण्ड आदि देकर कहा - ॥3॥
 
Seeing Maharishi Narada arriving there, Yamraj, according to the rules of hospitality, offered him offerings etc. and said - ॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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