Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.21.23-24h: इससे उन पापियों को कुछ समय के लिए बहुत खुशी मिली, जिसकी उन्हें न तो उम्मीद थी और न ही वे इसके बारे में सोच सकते थे। जब सभी भूत उस महान राक्षस के अत्याचार से मुक्त हो गए, तब यम के दूत जो उन भूतों की रक्षा कर रहे थे, बहुत क्रोधित हो गए और उन्होंने राक्षस राजा पर हमला कर दिया। 23 1/2।   |   ramayan सर्ग 7.21: रावण का यमलोक पर आक्रमण और उसके द्वारा यमराज के सैनिकों का संहार   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 21: रावण का यमलोक पर आक्रमण और उसके द्वारा यमराज के सैनिकों का संहार  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  7.21.23-24h 
सुखमापुर्मुहूर्तं ते ह्यतर्कितमचिन्तितम्।
प्रेतेषु मुच्यमानेषु राक्षसेन महीयसा॥ २३॥
प्रेतगोपा: सुसंक्रुद्धा राक्षसेन्द्रमभिद्रवन्।
 
 
अनुवाद
इससे उन पापियों को कुछ समय के लिए बहुत खुशी मिली, जिसकी उन्हें न तो उम्मीद थी और न ही वे इसके बारे में सोच सकते थे। जब सभी भूत उस महान राक्षस के अत्याचार से मुक्त हो गए, तब यम के दूत जो उन भूतों की रक्षा कर रहे थे, बहुत क्रोधित हो गए और उन्होंने राक्षस राजा पर हमला कर दिया। 23 1/2।
 
This brought great happiness to those sinners for a while, which they had neither expected to get nor could they even think about. When all the ghosts were freed from torture by that great demon, then the messengers of Yama who were protecting those ghosts became very angry and attacked the demon king. 23 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)