Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.21.15-17: असिपत्र वन में तलवारों के समान तीखे पत्तों वाले कुछ पापी चीर-फाड़ किए जा रहे थे। कुछ को रौरव नरक में डाला गया। कुछ को खारे पानी से भरी नदियों में डुबोया गया और बहुतों को चाकुओं की धारों पर दौड़ाया गया। बहुत से प्राणी भूख-प्यास से पीड़ित होकर थोड़ा-सा पानी मांग रहे थे। कुछ तो शव के समान कृश, दीन, दुर्बल, उदास और खुले केशों वाले दिखाई दे रहे थे। बहुत से प्राणी दयनीय और सूखे शरीरों से, जिनके अंगों पर मैल और कीचड़ लगा हुआ था, इधर-उधर भाग रहे थे। रावण ने मार्ग में ऐसे सैकड़ों और हजारों प्राणियों को यातनाएँ सहते हुए देखा॥15-17॥ | ramayan सर्ग 7.21: रावण का यमलोक पर आक्रमण और उसके द्वारा यमराज के सैनिकों का संहार । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
असिपत्र वन में तलवारों के समान तीखे पत्तों वाले कुछ पापी चीर-फाड़ किए जा रहे थे। कुछ को रौरव नरक में डाला गया। कुछ को खारे पानी से भरी नदियों में डुबोया गया और बहुतों को चाकुओं की धारों पर दौड़ाया गया। बहुत से प्राणी भूख-प्यास से पीड़ित होकर थोड़ा-सा पानी मांग रहे थे। कुछ तो शव के समान कृश, दीन, दुर्बल, उदास और खुले केशों वाले दिखाई दे रहे थे। बहुत से प्राणी दयनीय और सूखे शरीरों से, जिनके अंगों पर मैल और कीचड़ लगा हुआ था, इधर-उधर भाग रहे थे। रावण ने मार्ग में ऐसे सैकड़ों और हजारों प्राणियों को यातनाएँ सहते हुए देखा॥15-17॥
Some sinners were being torn apart in the Asipatra forest whose leaves were as sharp as the blades of swords. Some were thrown into the Raurava hell. Some were drowned in rivers filled with salty water and many were made to run over the blades of knives. Many beings were suffering from hunger and thirst and were begging for a little water. Some looked as gaunt as corpses, miserable, weak, sad and with open hair. Many beings were running around with pitiable and dry bodies, with dirt and mud smeared on their limbs. Ravana saw hundreds and thousands of such beings being tortured on the way.॥15-17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥