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ramayan 7.21.14: कोई तो रक्त से भरी हुई वैतरणी नदी को बार-बार पार करने को विवश हुए, और कोई तो तपती रेत पर बार-बार चलकर कष्ट पाते रहे॥14॥   |   ramayan सर्ग 7.21: रावण का यमलोक पर आक्रमण और उसके द्वारा यमराज के सैनिकों का संहार   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 21: रावण का यमलोक पर आक्रमण और उसके द्वारा यमराज के सैनिकों का संहार  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.21.14 
संतार्यमाणान् वैतरणीं बहुश: शोणितोदकाम्।
वालुकासु च तप्तासु तप्यमानान् मुहुर्मुहु:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
कोई तो रक्त से भरी हुई वैतरणी नदी को बार-बार पार करने को विवश हुए, और कोई तो तपती रेत पर बार-बार चलकर कष्ट पाते रहे॥14॥
 
Some were forced to cross the blood-filled river Vaitarni again and again, and some were tormented by walking repeatedly on hot sand.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)