श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 21: रावण का यमलोक पर आक्रमण और उसके द्वारा यमराज के सैनिकों का संहार  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.21.1 
एवं संचिन्त्य विप्रेन्द्रो जगाम लघुविक्रम:।
आख्यातुं तद् यथावृत्तं यमस्य सदनं प्रति॥ १॥
 
 
अनुवाद
(अगस्त्यजी कहते हैं-रघुनन्दन!) ऐसा सोचते हुए तीव्रगामी विप्रवर नारदजी यमलोक में जाकर रावण के आक्रमण का समाचार सुनाने लगे। 1॥
 
(Agastyaji says - Raghunandan!) Thinking this, the fast-moving Vipravar Naradji went to Yamalok to tell the news of Ravana's attack. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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