Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.20.9: जो अपने कल्याण के प्रति सदैव उदासीन रहते हैं, जो महान् विपत्तियों से घिरे हुए हैं, तथा जो बुढ़ापे और सैकड़ों रोगों से पीड़ित हैं, उन्हें कोई भी शूरवीर कैसे मार सकता है?॥9॥ | ramayan सर्ग 7.20: नारदजी का रावण को समझाना, उनके कहने से रावण का युद्ध के लिये यमलोक को जाना तथा नारदजी का इस युद्ध के विषयमें विचार करना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो अपने कल्याण के प्रति सदैव उदासीन रहते हैं, जो महान् विपत्तियों से घिरे हुए हैं, तथा जो बुढ़ापे और सैकड़ों रोगों से पीड़ित हैं, उन्हें कोई भी शूरवीर कैसे मार सकता है?॥9॥
How can any brave man kill those who are always oblivious to their own welfare, who are surrounded by great calamities, and who are afflicted with old age and hundreds of diseases?॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥