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ramayan 7.20.8: देवता, दानव, राक्षस, यक्ष, गन्धर्व और राक्षस भी जिसे नहीं मार सकते, ऐसे विख्यात योद्धा होकर भी आप इस मनुष्य लोक को दुःख दें, यह आपके योग्य नहीं है।॥8॥   |   ramayan सर्ग 7.20: नारदजी का रावण को समझाना, उनके कहने से रावण का युद्ध के लिये यमलोक को जाना तथा नारदजी का इस युद्ध के विषयमें विचार करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 20: नारदजी का रावण को समझाना, उनके कहने से रावण का युद्ध के लिये यमलोक को जाना तथा नारदजी का इस युद्ध के विषयमें विचार करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.20.8 
देवदानवदैत्यानां यक्षगन्धर्वरक्षसाम्।
अवध्येन त्वया लोक: क्लेष्टुं योग्यो न मानुष:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
देवता, दानव, राक्षस, यक्ष, गन्धर्व और राक्षस भी जिसे नहीं मार सकते, ऐसे विख्यात योद्धा होकर भी आप इस मनुष्य लोक को दुःख दें, यह आपके योग्य नहीं है।॥8॥
 
Even being a renowned warrior, who cannot be killed even by gods, demons, devils, yakshas, ​​gandharvas and rakshasas, you should cause suffering to this world of humans, this is not worthy of you. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)