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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 20: नारदजी का रावण को समझाना, उनके कहने से रावण का युद्ध के लिये यमलोक को जाना तथा नारदजी का इस युद्ध के विषयमें विचार करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.20.6 
किंचिद् वक्ष्यामि तावत् तु श्रोतव्यं श्रोष्यसे यदि।
तन्मे निगदतस्तात समाधिं श्रवणे कुरु॥ ६॥
 
 
अनुवाद
यदि तुम इस समय सुनो, तो मैं तुम्हें सुनने योग्य बात कहूँगा। हे प्रिये! मेरे मुख से निकलने वाले वचनों को सुनने के लिए अपना मन एकाग्र करो।
 
‘If you listen at this time, I will tell you something worth listening to. O dear! Concentrate your mind to hear the words that come out of my mouth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)