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ramayan 7.20.33: अब मेरे मन में बड़ी जिज्ञासा उत्पन्न हुई है; अतः मैं स्वयं यमलोक जाकर यमराज तथा दैत्यराज के बीच होने वाले युद्ध को देखूँगा।'   |   ramayan सर्ग 7.20: नारदजी का रावण को समझाना, उनके कहने से रावण का युद्ध के लिये यमलोक को जाना तथा नारदजी का इस युद्ध के विषयमें विचार करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 20: नारदजी का रावण को समझाना, उनके कहने से रावण का युद्ध के लिये यमलोक को जाना तथा नारदजी का इस युद्ध के विषयमें विचार करना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  7.20.33 
कौतूहलं समुत्पन्नो यास्यामि यमसादनम्।
विमर्दं द्रष्टुमनयोर्यमराक्षसयो: स्वयम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
अब मेरे मन में बड़ी जिज्ञासा उत्पन्न हुई है; अतः मैं स्वयं यमलोक जाकर यमराज तथा दैत्यराज के बीच होने वाले युद्ध को देखूँगा।'
 
Now a great curiosity has arisen in my mind; therefore, I will myself go to Yamaloka to see the battle between Yamaraja and the King of Demons.'
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे विंश: सर्ग: ॥ २ ०॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें बीसवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ २ ०॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)