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ramayan 7.20.3: तब अनंत, तेजस्वी और तेजस्वी देवता नारदजी ने बादलों की पीठ पर खड़े होकर पुष्पकविमान पर बैठे हुए रावण से कहा-॥6॥   |   ramayan सर्ग 7.20: नारदजी का रावण को समझाना, उनके कहने से रावण का युद्ध के लिये यमलोक को जाना तथा नारदजी का इस युद्ध के विषयमें विचार करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 20: नारदजी का रावण को समझाना, उनके कहने से रावण का युद्ध के लिये यमलोक को जाना तथा नारदजी का इस युद्ध के विषयमें विचार करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.20.3 
नारदस्तु महातेजा देवर्षिरमितप्रभ:।
अब्रवीन्मेघपृष्ठस्थो रावणं पुष्पके स्थितम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
तब अनंत, तेजस्वी और तेजस्वी देवता नारदजी ने बादलों की पीठ पर खड़े होकर पुष्पकविमान पर बैठे हुए रावण से कहा-॥6॥
 
Then Narad, the infinite, bright and brilliant deity, standing on the back of the clouds, said to Ravana sitting on Pushpakavimaan – ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)