Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.20.28-29h: वे कालस्वरूप यमराज, जिनके द्वारा इन्द्र सहित तीनों लोकों के प्राणियों को कष्ट दिया जाता है और धर्मपूर्वक दण्ड दिया जाता है, इस रावण के द्वारा आयु क्षीण होने पर कैसे जीते जाएँगे? 28॥   |   ramayan सर्ग 7.20: नारदजी का रावण को समझाना, उनके कहने से रावण का युद्ध के लिये यमलोक को जाना तथा नारदजी का इस युद्ध के विषयमें विचार करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 20: नारदजी का रावण को समझाना, उनके कहने से रावण का युद्ध के लिये यमलोक को जाना तथा नारदजी का इस युद्ध के विषयमें विचार करना  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  7.20.28-29h 
येन लोकास्त्रय: सेन्द्रा: क्लिश्यन्ते सचराचरा:॥ २८॥
क्षीणे चायुषि धर्मेण स कालो जेष्यते कथम्।
 
 
अनुवाद
वे कालस्वरूप यमराज, जिनके द्वारा इन्द्र सहित तीनों लोकों के प्राणियों को कष्ट दिया जाता है और धर्मपूर्वक दण्ड दिया जाता है, इस रावण के द्वारा आयु क्षीण होने पर कैसे जीते जाएँगे? 28॥
 
How will that Kaalswaroop Yamraj, by whom the living beings of the three worlds including Indra are put to sufferings and punished in a religious manner, be conquered by this Ravana, when their age diminishes? 28 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)