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ramayan 7.20.26-27h: यह कहकर दशग्रीव ने ऋषि को प्रणाम किया और अपने मंत्रियों के साथ दक्षिण दिशा की ओर चल पड़ा।   |   ramayan सर्ग 7.20: नारदजी का रावण को समझाना, उनके कहने से रावण का युद्ध के लिये यमलोक को जाना तथा नारदजी का इस युद्ध के विषयमें विचार करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 20: नारदजी का रावण को समझाना, उनके कहने से रावण का युद्ध के लिये यमलोक को जाना तथा नारदजी का इस युद्ध के विषयमें विचार करना  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  7.20.26-27h 
एवमुक्त्वा दशग्रीवो मुनिं तमभिवाद्य च॥ २६॥
प्रययौ दक्षिणामाशां प्रविष्ट: सह मन्त्रिभि:।
 
 
अनुवाद
यह कहकर दशग्रीव ने ऋषि को प्रणाम किया और अपने मंत्रियों के साथ दक्षिण दिशा की ओर चल पड़ा।
 
Saying this, Daśagriva bowed to the sage and along with his ministers, he proceeded towards the south.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)