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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 20: नारदजी का रावण को समझाना, उनके कहने से रावण का युद्ध के लिये यमलोक को जाना तथा नारदजी का इस युद्ध के विषयमें विचार करना  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  7.20.24-25h 
मया हि भगवन् क्रोधात् प्रतिज्ञातं रणार्थिना॥ २४॥
अवजेष्यामि चतुरो लोकपालानिति प्रभो।
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! हे प्रभु! युद्ध की इच्छा से मैंने क्रोधपूर्वक प्रतिज्ञा की है कि मैं चारों लोकपालों को परास्त कर दूँगा।
 
Lord! Lord! With a desire for war, I have angrily vowed that I will defeat all four Lokpals.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)