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ramayan 7.20.19-20h: फिर तीनों लोकों पर विजय प्राप्त करके, नागों और देवताओं को वश में करके, अमृत प्राप्त करने के लिए मैं अमृतसागर का मंथन करूँगा॥19 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.20: नारदजी का रावण को समझाना, उनके कहने से रावण का युद्ध के लिये यमलोक को जाना तथा नारदजी का इस युद्ध के विषयमें विचार करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 20: नारदजी का रावण को समझाना, उनके कहने से रावण का युद्ध के लिये यमलोक को जाना तथा नारदजी का इस युद्ध के विषयमें विचार करना  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  7.20.19-20h 
ततो लोकत्रयं जित्वा स्थाप्य नागान् सुरान् वशे॥ १९॥
समुद्रममृतार्थं च मथिष्यामि रसालयम्।
 
 
अनुवाद
फिर तीनों लोकों पर विजय प्राप्त करके, नागों और देवताओं को वश में करके, अमृत प्राप्त करने के लिए मैं अमृतसागर का मंथन करूँगा॥19 1/2॥
 
Then after conquering the three worlds and subduing the snakes and gods, I will churn the ocean of nectar to obtain nectar'. 19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)