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ramayan 7.20.16-17h: शत्रु नगर को जीतने वाले पुलस्त्यनंदन! इन सब मनुष्यों को यमलोक जाना है। अतः यदि तुममें शक्ति हो तो यमराज को अपने वश में कर लो। उन्हें जीतकर तुम सबको जीत सकते हो; इसमें संशय नहीं है।॥16 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.20: नारदजी का रावण को समझाना, उनके कहने से रावण का युद्ध के लिये यमलोक को जाना तथा नारदजी का इस युद्ध के विषयमें विचार करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 20: नारदजी का रावण को समझाना, उनके कहने से रावण का युद्ध के लिये यमलोक को जाना तथा नारदजी का इस युद्ध के विषयमें विचार करना  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  7.20.16-17h 
अवश्यमेभि: सर्वैश्च गन्तव्यं यमसादनम्।
तन्निगृह्णीष्व पौलस्त्य यमं परपुरंजय॥ १६॥
तस्मिञ्जिते जितं सर्वं भवत्येव न संशय:।
 
 
अनुवाद
शत्रु नगर को जीतने वाले पुलस्त्यनंदन! इन सब मनुष्यों को यमलोक जाना है। अतः यदि तुममें शक्ति हो तो यमराज को अपने वश में कर लो। उन्हें जीतकर तुम सबको जीत सकते हो; इसमें संशय नहीं है।॥16 1/2॥
 
‘Pulastyanadan, the conqueror of the enemy city! All these men have to go to Yamaloka. Therefore, if you have the power, then bring Yamaraja under your control. After defeating him, you can conquer everyone; there is no doubt about this.'॥ 16 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)