Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.20.14: माता, पिता और पुत्र के प्रेम के कारण तथा स्त्री और भाई के सम्बन्ध में नाना प्रकार की योजनाएँ बनाकर यह मनुष्य जगत् मोहग्रस्त होकर परमार्थ से भ्रष्ट हो रहा है। इसे अपने बंधन से उत्पन्न होने वाले दुःख का अनुभव नहीं होता। 14॥ | ramayan सर्ग 7.20: नारदजी का रावण को समझाना, उनके कहने से रावण का युद्ध के लिये यमलोक को जाना तथा नारदजी का इस युद्ध के विषयमें विचार करना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
माता, पिता और पुत्र के प्रेम के कारण तथा स्त्री और भाई के सम्बन्ध में नाना प्रकार की योजनाएँ बनाकर यह मनुष्य जगत् मोहग्रस्त होकर परमार्थ से भ्रष्ट हो रहा है। इसे अपने बंधन से उत्पन्न होने वाले दुःख का अनुभव नहीं होता। 14॥
Because of the love of mother, father and son and by making various plans in relation to wife and brother, this human world is becoming deluded and corrupted from altruism. It does not experience the suffering caused by its bondage. 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥