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ramayan 7.20.12: हे महाबली दैत्यराज! देखो, यह मनुष्य जगत् किस प्रकार अज्ञानवश नाना प्रकार के तुच्छ प्रयत्नों में लगा हुआ है। इसे यह भी नहीं पता कि दुःख-सुख आदि भोगने का अवसर कब आएगा॥12॥   |   ramayan सर्ग 7.20: नारदजी का रावण को समझाना, उनके कहने से रावण का युद्ध के लिये यमलोक को जाना तथा नारदजी का इस युद्ध के विषयमें विचार करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 20: नारदजी का रावण को समझाना, उनके कहने से रावण का युद्ध के लिये यमलोक को जाना तथा नारदजी का इस युद्ध के विषयमें विचार करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.20.12 
पश्य तावन्महाबाहो राक्षसेश्वर मानुषम्।
मूढमेवं विचित्रार्थं यस्य न ज्ञायते गति:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हे महाबली दैत्यराज! देखो, यह मनुष्य जगत् किस प्रकार अज्ञानवश नाना प्रकार के तुच्छ प्रयत्नों में लगा हुआ है। इसे यह भी नहीं पता कि दुःख-सुख आदि भोगने का अवसर कब आएगा॥12॥
 
O mighty demon king! Just see how this human world, being ignorant due to lack of knowledge, is still involved in various petty endeavours. It does not even know when the opportunity to experience sorrow and happiness etc. will come.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)