Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.2.31-32h: 'देवी! मैं यहाँ वेदों का अध्ययन कर रहा था, उस समय आपने आकर उन्हें विस्तारपूर्वक सुना, अतः आपके पुत्र का नाम विश्रवा या विश्रवान् होगा; इसमें संशय नहीं है।'   |   ramayan सर्ग 7.2: महर्षि अगस्त्य के द्वारा पुलस्त्य के गुण और तपस्या का वर्णन तथा उनसे विश्रवा मुनि की उत्पत्ति का कथन   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 2: महर्षि अगस्त्य के द्वारा पुलस्त्य के गुण और तपस्या का वर्णन तथा उनसे विश्रवा मुनि की उत्पत्ति का कथन  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  7.2.31-32h 
यस्मात् तु विश्रुतो वेदस्त्वयेहाध्ययतो मम॥ ३१॥
तस्मात् स विश्रवा नाम भविष्यति न संशय:।
 
 
अनुवाद
'देवी! मैं यहाँ वेदों का अध्ययन कर रहा था, उस समय आपने आकर उन्हें विस्तारपूर्वक सुना, अतः आपके पुत्र का नाम विश्रवा या विश्रवान् होगा; इसमें संशय नहीं है।'
 
Devi! I was studying the Vedas here, at that time you came and listened to them in detail, therefore your son will be called Vishrava or Vishravan; there is no doubt about this.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)