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ramayan 7.2.27: उस धर्मात्मा राजा को ऐसी बातें कहते देख ब्रह्मर्षि ने अपनी पुत्री को स्वीकार करने की इच्छा से कहा - 'बहुत अच्छा ॥ 27॥   |   ramayan सर्ग 7.2: महर्षि अगस्त्य के द्वारा पुलस्त्य के गुण और तपस्या का वर्णन तथा उनसे विश्रवा मुनि की उत्पत्ति का कथन   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 2: महर्षि अगस्त्य के द्वारा पुलस्त्य के गुण और तपस्या का वर्णन तथा उनसे विश्रवा मुनि की उत्पत्ति का कथन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  7.2.27 
तं ब्रुवाणं तु तद् वाक्यं राजर्षिं धार्मिकं तदा।
जिघृक्षुरब्रवीत् कन्यां बाढमित्येव स द्विज:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
उस धर्मात्मा राजा को ऐसी बातें कहते देख ब्रह्मर्षि ने अपनी पुत्री को स्वीकार करने की इच्छा से कहा - 'बहुत अच्छा ॥ 27॥
 
Seeing that virtuous king saying such things, the Brahmarshi, desiring to accept his daughter, said, 'Very good.'॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)