Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.2.24: उस शुद्ध ऋषि के शाप को जानकर वह अपनी पुत्री के साथ पुलस्त्यजनी के पास गया और इस प्रकार बोला -॥24॥   |   ramayan सर्ग 7.2: महर्षि अगस्त्य के द्वारा पुलस्त्य के गुण और तपस्या का वर्णन तथा उनसे विश्रवा मुनि की उत्पत्ति का कथन   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 2: महर्षि अगस्त्य के द्वारा पुलस्त्य के गुण और तपस्या का वर्णन तथा उनसे विश्रवा मुनि की उत्पत्ति का कथन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  7.2.24 
स तु विज्ञाय तं शापं महर्षेर्भावितात्मन:।
गृहीत्वा तनयां गत्वा पुलस्त्यमिदमब्रवीत्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
उस शुद्ध ऋषि के शाप को जानकर वह अपनी पुत्री के साथ पुलस्त्यजनी के पास गया और इस प्रकार बोला -॥24॥
 
Knowing the curse of that pure sage, he went to Pulastyajni along with his daughter and spoke thus -॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)