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श्लोक  7.2.20 
सा तु कृत्वाञ्जलिं दीना कन्योवाच तपोधनम्।
न जाने कारणं तात येन मे रूपमीदृशम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
उस बेचारी बालिका ने हाथ जोड़कर तपस्वी ऋषि से कहा - 'पिताजी! मैं यह समझ नहीं पा रही हूँ कि मेरा रूप ऐसा क्यों हो गया है।
 
That poor girl folded her hands and said to the ascetic sage - 'Father! I am unable to understand the reason why my appearance has become like this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)