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श्लोक  7.2.18 
बभूव च समुद्विग्ना दृष्ट्वा तद्दोषमात्मन:।
इदं मे किंत्विति ज्ञात्वा पितुर्गत्वाऽऽश्रमे स्थिता॥ १८॥
 
 
अनुवाद
अपने शरीर में यह दोष देखकर वह भयभीत हो गई और यह सोचते हुए अपने पिता के आश्रम में गई कि, 'मुझे क्या हो गया है?'
 
Seeing this defect in her body she became frightened and went to her father's ashram, thinking, 'What has happened to me?'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)