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श्लोक  7.2.14-15h 
तृणबिन्दोस्तु राजर्षेस्तनया न शृणोति तत्॥ १४॥
गत्वाऽऽश्रमपदं तत्र विचचार सुनिर्भया।
 
 
अनुवाद
'किन्तु राजा तृणबिन्दु की पुत्री ने इस शाप के विषय में नहीं सुना था; अतः वह अगले दिन भी बिना किसी भय के आश्रम में आ गयी और घूमने लगी।
 
‘But the daughter of King Trinabindu had not heard of this curse; so the next day too she came without any fear and started roaming in the hermitage.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)