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ramayan 7.2.13-14h: उस महात्मा के ये वचन सुनकर सारी कन्याएँ ब्रह्माजी के शाप से भयभीत हो गईं और उन्होंने उस स्थान पर आना छोड़ दिया॥13 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.2: महर्षि अगस्त्य के द्वारा पुलस्त्य के गुण और तपस्या का वर्णन तथा उनसे विश्रवा मुनि की उत्पत्ति का कथन   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.2.13-14h 
तास्तु सर्वा: प्रतिश्रुत्य तस्य वाक्यं महात्मन:॥ १३॥
ब्रह्मशापभयाद् भीतास्तं देशं नोपचक्रमु:।
 
 
अनुवाद
उस महात्मा के ये वचन सुनकर सारी कन्याएँ ब्रह्माजी के शाप से भयभीत हो गईं और उन्होंने उस स्थान पर आना छोड़ दिया॥13 1/2॥
 
Hearing these words of that great soul, all the girls became frightened of the curse of Brahma and stopped coming to that place.॥ 13 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)