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ramayan 7.2.12-13h: इससे पुलस्त्य ऋषि कुछ क्रोधित होकर बोले, ‘कल से यहाँ जो भी कन्या मेरे दर्शन में आएगी, वह अवश्य ही गर्भ धारण करेगी।’ ॥12 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.2: महर्षि अगस्त्य के द्वारा पुलस्त्य के गुण और तपस्या का वर्णन तथा उनसे विश्रवा मुनि की उत्पत्ति का कथन   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 2: महर्षि अगस्त्य के द्वारा पुलस्त्य के गुण और तपस्या का वर्णन तथा उनसे विश्रवा मुनि की उत्पत्ति का कथन  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  7.2.12-13h 
अथ रुष्टो महातेजा व्याजहार महामुनि:॥ १२॥
या मे दर्शनमागच्छेत् सा गर्भं धारयिष्यति।
 
 
अनुवाद
इससे पुलस्त्य ऋषि कुछ क्रोधित होकर बोले, ‘कल से यहाँ जो भी कन्या मेरे दर्शन में आएगी, वह अवश्य ही गर्भ धारण करेगी।’ ॥12 1/2॥
 
Due to this the sage Pulastya became somewhat angry and said, 'From tomorrow any girl who comes in my sight here will surely conceive.' ॥12 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)