Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.19.4-5h: तब अनेक निर्भय, बुद्धिमान और पराक्रमी राजाओं ने धर्म का विचार करके, परस्पर परामर्श करके और शत्रु के बल को जानकर कहा - 'राक्षसराज! हम आपसे पराजय स्वीकार करते हैं।' ॥4 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.19: रावण के द्वारा अनरण्य का वध तथा उनके द्वारा उसे शाप की प्राप्ति   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 19: रावण के द्वारा अनरण्य का वध तथा उनके द्वारा उसे शाप की प्राप्ति  »  श्लोक 4-5h
 
 
श्लोक  7.19.4-5h 
ततस्त्वभीरव: प्राज्ञा: पार्थिवा धर्मनिश्चया:।
मन्त्रयित्वा ततोऽन्योन्यं राजान: सुमहाबला:॥ ४॥
निर्जिता: स्मेत्यभाषन्त ज्ञात्वा वरबलं रिपो:।
 
 
अनुवाद
तब अनेक निर्भय, बुद्धिमान और पराक्रमी राजाओं ने धर्म का विचार करके, परस्पर परामर्श करके और शत्रु के बल को जानकर कहा - 'राक्षसराज! हम आपसे पराजय स्वीकार करते हैं।' ॥4 1/2॥
 
Then many fearless, intelligent and mighty kings, having thought of religion, after consulting each other and realizing the strength of the enemy, said - 'King of demons! We accept defeat from you.' ॥ 4 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)