Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.19.27: हे राक्षस! तू अपने मुख से अपनी ही प्रशंसा कर रहा है; किन्तु आज तूने मुझे जो पराजित किया है, उसका कारण काल ही है। वास्तव में काल ने ही मुझे मारा है। तू मेरी मृत्यु का निमित्त मात्र बना है॥ 27॥ | ramayan सर्ग 7.19: रावण के द्वारा अनरण्य का वध तथा उनके द्वारा उसे शाप की प्राप्ति । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नह्यहं निर्जितो रक्षस्त्वया चात्मप्रशंसिना।
कालेनैव विपन्नोऽहं हेतुभूतस्तु मे भवान्॥ २७॥
अनुवाद
हे राक्षस! तू अपने मुख से अपनी ही प्रशंसा कर रहा है; किन्तु आज तूने मुझे जो पराजित किया है, उसका कारण काल ही है। वास्तव में काल ने ही मुझे मारा है। तू मेरी मृत्यु का निमित्त मात्र बना है॥ 27॥
Demon! You are praising yourself with your mouth; but the reason for you defeating me today is time. In reality, it is time that has killed me. You have become just an instrument in my death.॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥