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ramayan 7.19.26: राजा की प्राणशक्ति क्षीण हो रही थी। रावण की इस प्रकार बात सुनकर उन्होंने कहा, "हे राक्षसराज! अब क्या किया जा सकता है? क्योंकि समय का उल्लंघन करना अत्यंत कठिन है।"   |   ramayan सर्ग 7.19: रावण के द्वारा अनरण्य का वध तथा उनके द्वारा उसे शाप की प्राप्ति   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 19: रावण के द्वारा अनरण्य का वध तथा उनके द्वारा उसे शाप की प्राप्ति  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  7.19.26 
तस्यैवं ब्रुवतो राजा मन्दासुर्वाक्यमब्रवीत्।
किं शक्यमिह कर्तुं वै कालो हि दुरतिक्रम:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
राजा की प्राणशक्ति क्षीण हो रही थी। रावण की इस प्रकार बात सुनकर उन्होंने कहा, "हे राक्षसराज! अब क्या किया जा सकता है? क्योंकि समय का उल्लंघन करना अत्यंत कठिन है।"
 
The king's life force was waning. On hearing Ravana speak in this manner, he said, 'O demon king! What can be done now? Because it is extremely difficult to violate time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)