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ramayan 7.19.25: हे पुरुषों! तीनों लोकों में ऐसा कोई वीर नहीं है जो मुझे द्वंद्वयुद्ध में चुनौती दे सके। ऐसा प्रतीत होता है कि आप भोगों में अत्यधिक आसक्त होने के कारण मेरे पराक्रम के विषय में नहीं सुन पाए।॥25॥   |   ramayan सर्ग 7.19: रावण के द्वारा अनरण्य का वध तथा उनके द्वारा उसे शाप की प्राप्ति   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 19: रावण के द्वारा अनरण्य का वध तथा उनके द्वारा उसे शाप की प्राप्ति  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  7.19.25 
त्रैलोक्ये नास्ति यो द्वन्द्वं मम दद्यान्नराधिप।
शङ्के प्रसक्तो भोगेषु न शृणोषि बलं मम॥ २५॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषों! तीनों लोकों में ऐसा कोई वीर नहीं है जो मुझे द्वंद्वयुद्ध में चुनौती दे सके। ऐसा प्रतीत होता है कि आप भोगों में अत्यधिक आसक्त होने के कारण मेरे पराक्रम के विषय में नहीं सुन पाए।॥25॥
 
Lord of men! There is no such brave man in the three worlds who can challenge me in a duel. It seems that you did not hear about my prowess because you were too attached to pleasures.'॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)