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ramayan 7.19.18: तब महाराज अनरण्य क्रोध से अचेत होकर अपना इन्द्रधनुष के समान विशाल धनुष उठाकर रावण से भिड़ने आये।   |   ramayan सर्ग 7.19: रावण के द्वारा अनरण्य का वध तथा उनके द्वारा उसे शाप की प्राप्ति   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 19: रावण के द्वारा अनरण्य का वध तथा उनके द्वारा उसे शाप की प्राप्ति  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.19.18 
तत: शक्रधनु:प्रख्यं धनुर्विस्फारयन् स्वयम्।
आससाद नरेन्द्रस्तं रावणं क्रोधमूर्च्छित:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तब महाराज अनरण्य क्रोध से अचेत होकर अपना इन्द्रधनुष के समान विशाल धनुष उठाकर रावण से भिड़ने आये।
 
Then Maharaja Anaranya, unconscious with anger, came to confront Ravana, brandishing his bow which was as great as a rainbow.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)