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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 19: रावण के द्वारा अनरण्य का वध तथा उनके द्वारा उसे शाप की प्राप्ति  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.19.17 
सोऽपश्यत् तन्नरेन्द्रस्तु नश्यमानं महाबलम्।
महार्णवं समासाद्य वनापगशतं यथा॥ १७॥
 
 
अनुवाद
राजा ने देखा कि उसकी विशाल सेना ऐसे नष्ट हो रही है जैसे सैकड़ों जल से भरी नदियाँ समुद्र में पहुँचकर उसमें विलीन हो जाती हैं।
 
The king saw that his huge army was getting destroyed just like hundreds of rivers filled with water merge into the ocean when they reach it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)