Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.19.15-16: वह सेना बहुत समय तक युद्ध करती रही और बड़ी वीरता दिखाती रही; परन्तु महाबली रावण के सामने वह बहुत कम संख्या में रह गई और अन्त में मृत्यु के मुख में चली गई, जैसे पतंगे अग्नि में भस्म हो जाते हैं॥15-16॥   |   ramayan सर्ग 7.19: रावण के द्वारा अनरण्य का वध तथा उनके द्वारा उसे शाप की प्राप्ति   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 19: रावण के द्वारा अनरण्य का वध तथा उनके द्वारा उसे शाप की प्राप्ति  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  7.19.15-16 
युद्‍ध्वा च सुचिरं कालं कृत्वा विक्रममुत्तमम्॥ १५॥
प्रज्वलन्तं तमासाद्य क्षिप्रमेवावशेषितम्।
प्राविशत् संकुलं तत्र शलभा इव पावकम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वह सेना बहुत समय तक युद्ध करती रही और बड़ी वीरता दिखाती रही; परन्तु महाबली रावण के सामने वह बहुत कम संख्या में रह गई और अन्त में मृत्यु के मुख में चली गई, जैसे पतंगे अग्नि में भस्म हो जाते हैं॥15-16॥
 
That army fought for a long time and displayed great valour; but in the face of the mighty Ravana, it remained in very small numbers and ultimately went to the jaws of death just like moths are reduced to ashes in a fire.॥ 15-16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)