श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 19: रावण के द्वारा अनरण्य का वध तथा उनके द्वारा उसे शाप की प्राप्ति  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.19.10 
दीयते द्वन्द्वयुद्धं ते राक्षसाधिपते मया।
संतिष्ठ क्षिप्रमायत्तो भव चैवं भवाम्यहम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे रात्रिदेव! मैं तुम्हें द्वन्द्वयुद्ध का अवसर दे रहा हूँ। रुको, शीघ्र युद्ध के लिए तैयार हो जाओ। मैं भी तैयार हो रहा हूँ।॥10॥
 
‘O lord of nights! I am giving you an opportunity to fight a duel. Wait, get ready for the battle quickly. I am also getting ready.'॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)