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ramayan 7.18.35: ‘तुम्हारा सिर सदैव स्वर्णमय रहेगा और चिरस्थायी रहेगा। मेरी प्रसन्नता से तुम्हारा काला रंग स्वर्णमय हो जाएगा।’॥35॥   |   ramayan सर्ग 7.18: रावण द्वारा मरुत्त की पराजय तथा इन्द्र आदि देवताओं का मयूर आदि पक्षियों को वरदान देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 18: रावण द्वारा मरुत्त की पराजय तथा इन्द्र आदि देवताओं का मयूर आदि पक्षियों को वरदान देना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  7.18.35 
सद्रव्यं च शिरो नित्यं भविष्यति तवाक्षयम्।
एष काञ्चनको वर्णो मत्प्रीत्या ते भविष्यति॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
‘तुम्हारा सिर सदैव स्वर्णमय रहेगा और चिरस्थायी रहेगा। मेरी प्रसन्नता से तुम्हारा काला रंग स्वर्णमय हो जाएगा।’॥35॥
 
‘Your head will always be of golden colour and will be everlasting. By my pleasure your black colour will turn into golden colour.'॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)