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ramayan 7.18.33: श्री राम! पहले हंसों का रंग पूरी तरह सफ़ेद नहीं होता था। उनके पंखों का अगला भाग नीला होता था और उनकी भुजाओं के बीच का भाग किसी नई घास के पत्ते के अगले भाग जैसा कोमल और गहरे रंग का होता था।   |   ramayan सर्ग 7.18: रावण द्वारा मरुत्त की पराजय तथा इन्द्र आदि देवताओं का मयूर आदि पक्षियों को वरदान देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.18.33 
हंसानां हि पुरा राम न वर्ण: सर्वपाण्डुर:।
पक्षा नीलाग्रसंवीता: क्रोडा: शष्पाग्रनिर्मला:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
श्री राम! पहले हंसों का रंग पूरी तरह सफ़ेद नहीं होता था। उनके पंखों का अगला भाग नीला होता था और उनकी भुजाओं के बीच का भाग किसी नई घास के पत्ते के अगले भाग जैसा कोमल और गहरे रंग का होता था।
 
Shri Ram! In the past, the colour of swans was not completely white. The front part of their wings was blue and the part between their arms was soft and dark in colour like the front part of a new grass blade.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)