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ramayan 7.18.32: मेरे चमत्कारी जल का आश्रय लेकर तुम सदैव तेजस्वी बने रहोगे और अद्वितीय सुख प्राप्त करोगे। यही मेरे प्रेम का प्रतीक होगा॥32॥   |   ramayan सर्ग 7.18: रावण द्वारा मरुत्त की पराजय तथा इन्द्र आदि देवताओं का मयूर आदि पक्षियों को वरदान देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 18: रावण द्वारा मरुत्त की पराजय तथा इन्द्र आदि देवताओं का मयूर आदि पक्षियों को वरदान देना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  7.18.32 
मच्छरीरं समासाद्य कान्तो नित्यं भविष्यसि।
प्राप्स्यसे चातुलां प्रीतिमेतन्मे प्रीतिलक्षणम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
मेरे चमत्कारी जल का आश्रय लेकर तुम सदैव तेजस्वी बने रहोगे और अद्वितीय सुख प्राप्त करोगे। यही मेरे प्रेम का प्रतीक होगा॥32॥
 
By taking shelter of my miraculous water, you will always remain radiant and you will attain unique happiness. This will be the symbol of my love. 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)