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ramayan 7.18.3: उस समय बृहस्पति के भाई और धर्म के तत्त्व को जानने वाले ब्रह्मर्षि समस्त देवताओं से घिरे हुए यज्ञ कर रहे थे॥3॥   |   ramayan सर्ग 7.18: रावण द्वारा मरुत्त की पराजय तथा इन्द्र आदि देवताओं का मयूर आदि पक्षियों को वरदान देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 18: रावण द्वारा मरुत्त की पराजय तथा इन्द्र आदि देवताओं का मयूर आदि पक्षियों को वरदान देना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.18.3 
संवर्तो नाम ब्रह्मर्षि: साक्षाद् भ्राता बृहस्पते:।
याजयामास धर्मज्ञ: सर्वैर्देवगणैर्वृत:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
उस समय बृहस्पति के भाई और धर्म के तत्त्व को जानने वाले ब्रह्मर्षि समस्त देवताओं से घिरे हुए यज्ञ कर रहे थे॥3॥
 
At that time Brahmarshi, the brother of Brihaspati and who knew the essence of religion, was performing the Yagya surrounded by all the gods. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)