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ramayan 7.18.28: विहंगम! मेरे वरदान के कारण तुम्हें मृत्यु का भय नहीं रहेगा। जब तक मनुष्य तथा अन्य प्राणी तुम्हें मार नहीं डालेंगे, तब तक तुम जीवित रहोगे॥ 28॥   |   ramayan सर्ग 7.18: रावण द्वारा मरुत्त की पराजय तथा इन्द्र आदि देवताओं का मयूर आदि पक्षियों को वरदान देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 18: रावण द्वारा मरुत्त की पराजय तथा इन्द्र आदि देवताओं का मयूर आदि पक्षियों को वरदान देना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.18.28 
मृत्युतस्ते भयं नास्ति वरान् मम विहङ्गम।
यावत् त्वां न वधिष्यन्ति नरास्तावद् भविष्यसि॥ २८॥
 
 
अनुवाद
विहंगम! मेरे वरदान के कारण तुम्हें मृत्यु का भय नहीं रहेगा। जब तक मनुष्य तथा अन्य प्राणी तुम्हें मार नहीं डालेंगे, तब तक तुम जीवित रहोगे॥ 28॥
 
Vihangam! Due to my boon you will not fear death. As long as humans and other creatures do not kill you, you will remain alive.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)